सभी पर्व

एकादशी

ग्यारहवीं तिथि, महीने में दो बार।

कब पड़ता है

आगामी तिथियाँ

  • मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026
  • गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026
  • गुरुवार, 5 नवंबर 2026
  • शुक्रवार, 20 नवंबर 2026
  • शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026
  • रविवार, 20 दिसंबर 2026
  • रविवार, 3 जनवरी 2027
  • मंगलवार, 19 जनवरी 2027
  • मंगलवार, 2 फ़रवरी 2027
  • बुधवार, 17 फ़रवरी 2027
  • गुरुवार, 4 मार्च 2027
  • गुरुवार, 18 मार्च 2027
  • शुक्रवार, 2 अप्रैल 2027
  • शनिवार, 17 अप्रैल 2027
  • रविवार, 2 मई 2027
  • रविवार, 16 मई 2027
  • मंगलवार, 1 जून 2027
  • सोमवार, 14 जून 2027
  • बुधवार, 30 जून 2027
  • बुधवार, 14 जुलाई 2027
  • गुरुवार, 29 जुलाई 2027
  • गुरुवार, 12 अगस्त 2027
  • शनिवार, 28 अगस्त 2027
  • शनिवार, 11 सितंबर 2027

हर की पौड़ी, हरिद्वार के सूर्योदय के अनुसार

नियम
एकादशी, दोनों पक्षों की तिथि 11
कौन-सा दिन
सूर्योदय (उदयव्यापिनी)
स्मार्त एकादशी की गणना और अंकन किया जाता है। जब तिथि विद्धा हो, यानी सूर्योदय पर दशमी से मिली हो, तो स्मार्त और वैष्णव परंपराएँ अलग-अलग दिन मानती हैं। वैष्णव दिन की गणना यहाँ अभी नहीं होती।
महत्व
नित्य कर्म
आवृत्ति
हर चांद्र मास
यहीं गणना, दृक पंचांग से मिलान

यह क्या है

एकादशी हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि है, इसलिए यह चांद्र मास में दो बार और वर्ष में लगभग चौबीस से छब्बीस बार आती है। यह सबसे पहले घर पर रखा जाने वाला व्रत है, जिसके अपने नियम हैं कि क्या खाया जाए और व्रत कब खोला जाए। प्रातः स्नान इस दिन की रीति का अंग है। यह घर का पर्व है, और जो घर इसे रखते हैं उन्हें हर एकादशी इस पंचांग में मिलेगी।

कहाँ रखा जाता है

छहों जल पर एक समान रखी जाती है।

  • गंगा

    हर की पौड़ी, हरिद्वार

    पूर्णिमांत गणना

    जहाँ गंगा पहाड़ों से मैदान में उतरती है

  • त्रिवेणी संगम

    संगम, प्रयागराज

    पूर्णिमांत गणना

    जहाँ गंगा, यमुना और सरस्वती मिलती हैं

  • यमुना

    विश्राम घाट, मथुरा

    पूर्णिमांत गणना

    कृष्ण की अपनी नदी

  • गोदावरी

    रामकुंड, नासिक

    अमांत गणना

    दक्षिण गंगा

  • शिप्रा

    रामघाट, उज्जैन

    पूर्णिमांत गणना

    सिंहस्थ कुंभ की भूमि

  • कावेरी

    तलकावेरी, कोडगु

    अमांत गणना

    कावेरी का उद्गम

बेलाएँ

  • ब्रह्म मुहूर्त

    लगभग 48 मिनट

    सूर्योदय से

    परिभाषा
    सूर्योदय से रात के दो मुहूर्त पहले से एक मुहूर्त पहले तक। रात का मुहूर्त रात का पंद्रहवाँ भाग है, विषुव पर लगभग 48 मिनट और सर्दियों में अधिक।

    ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले आता है, इसलिए यह उस पंचांग-दिवस का है जो पिछले सूर्योदय पर शुरू हुआ था, और इसके साथ लिखी अंग्रेज़ी तारीख़ अगले दिन की होती है। यह पंचांग दोनों को अलग रखता है।

  • प्रातः स्नान

    लगभग 96 मिनट

    सूर्योदय से

    परिभाषा
    सूर्योदय से दिन के दो मुहूर्त बाद तक। दिन का मुहूर्त दिनमान का पंद्रहवाँ भाग है, विषुव पर लगभग 48 मिनट और गर्मियों में अधिक।

    यह बेला सूर्योदय के बाद है, इसलिए इसका पंचांग-दिवस और इसकी अंग्रेज़ी तारीख़ एक ही होते हैं।

हर समय पहले घाट का दिया जाता है, और उसके साथ आपके समयक्षेत्र का। घड़ी कैसे पढ़ी जाती है

यहीं गणना, दृक पंचांग से मिलान

समय कहाँ से आता है

स्रोत
यहीं गणना, दृक पंचांग से मिलान
अयनांश
लाहिड़ी (चित्रापक्ष)
घाट के निर्देशांक
हर की पौड़ी, हरिद्वार: 29.9457, 78.1642

शास्त्रीय आधार

एकादशी व्रत का विस्तृत विवेचन वैष्णव और स्मार्त निबंध-साहित्य में है, जहाँ दोनों परंपराओं के नियम अलग होते हैं। उद्धरण योग्य संस्करण और अंश अभी जोड़ा जाना है।

यहाँ की हर तिथि गणना से आती है: घाट के सूर्योदय पर तिथि, जिस संक्रांति को समेटे वह मास, और लाहिड़ी अयनांश के अनुसार सूर्य का हर राशि में प्रवेश। तिथि, नक्षत्र, सूर्योदय और बेलाएँ हरिद्वार के लिए सितंबर 2026 से मार्च 2027 के बीच आठ दिनों पर दृक पंचांग से मिलाई गईं, मिनट तक। तिथियाँ हर सुबह आगे बढ़ती हैं।

यहीं गणना, दृक पंचांग से मिलान