मुहूर्त पंचांग
आगामी बारह महीनों के पर्व, दिन की वे बेलाएँ जिनमें वे रखे जाते हैं, और हर एक की तिथि के बारे में कितना पता है।
यहाँ की हर तिथि गणना से आती है: घाट के सूर्योदय पर तिथि, जिस संक्रांति को समेटे वह मास, और लाहिड़ी अयनांश के अनुसार सूर्य का हर राशि में प्रवेश। तिथि, नक्षत्र, सूर्योदय और बेलाएँ हरिद्वार के लिए सितंबर 2026 से मार्च 2027 के बीच आठ दिनों पर दृक पंचांग से मिलाई गईं, मिनट तक। तिथियाँ हर सुबह आगे बढ़ती हैं।
२५ सितंबर २०२६ से बारह महीने
इस पंचांग को कैसे पढ़ें
- तारीख़ के बजाय महीना
- जहाँ सटीक तारीख़ अभी पक्की नहीं की जा सकती, वहाँ महीना और तिथि का नियम छापा जाता है। नियम एक परिभाषा है, इसलिए वह तथ्य है।
- दोनों घड़ियाँ
- समय पहले घाट का दिया जाता है, और उसके साथ आपके समयक्षेत्र का, दिन का अंतर लिखकर।
- सूर्योदय से सूर्योदय
- हिंदू दिन सूर्योदय पर बदलता है। सुबह 4:24 की बेला उस पंचांग-दिवस की है जो पिछली भोर शुरू हुआ था।
हर महीने
चार पर्व अपने क्रम से लौटते हैं और नीचे के हर महीने में चलते हैं।
आगामी बारह महीने
महीना
पर्व
तिथि नियम
कब
सितंबर
२०२६
पूर्णिमा
पूर्णिमा, हर चांद्र मास में एक बार।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
शुक्ल पूर्णिमा, तिथि 15
शनि, २६ सित॰
पितृ पक्ष
अपने कुल के पितरों के लिए सोलह दिन।
कहाँ 4 जल. प्रमुख पर्व.
पूर्णिमांत गणना में भाद्रपद कृष्ण पक्ष; अमांत गणना में आश्विन कृष्ण पक्ष, एक ही सोलह दिन, दो मास-नामों से
रवि, २७ सित॰ से शनि, १० अक्टू॰
अक्टूबर
२०२६
पितृ पक्ष
अपने कुल के पितरों के लिए सोलह दिन।
कहाँ 4 जल. प्रमुख पर्व.
पूर्णिमांत गणना में भाद्रपद कृष्ण पक्ष; अमांत गणना में आश्विन कृष्ण पक्ष, एक ही सोलह दिन, दो मास-नामों से
रवि, २७ सित॰ से शनि, १० अक्टू॰
एकादशी
ग्यारहवीं तिथि, महीने में दो बार।
कहाँ 6 जल. नित्य कर्म.
एकादशी, दोनों पक्षों की तिथि 11
मंगल, ६ अक्टू॰
गुरु, २२ अक्टू॰
अमावस्या
अमावस्या, जब पितरों को याद किया जाता है।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
अमावस्या, तिथि 30
शनि, १० अक्टू॰
संक्रांति
सूर्य नई राशि में आता है, वर्ष में बारह बार।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
सूर्य का निरयण राशि-प्रवेश
शनि, १७ अक्टू॰, १९:५८
कावेरी संक्रमण
तुला संक्रमण, तीर्थोद्भव: कावेरी अपने उद्गम पर उमड़ती है।
कहाँ एक जल. प्रमुख पर्व.
सूर्य का तुला राशि में निरयण प्रवेश
शनि, १७ अक्टू॰, १९:५८
शरद पूर्णिमा
कोजागरी, वह रात जब चंद्रमा अमृत से भरा माना जाता है।
कहाँ 3 जल. प्रमुख पर्व.
आश्विन शुक्ल पूर्णिमा, मध्यरात्रि पर
रवि, २५ अक्टू॰
पूर्णिमा
पूर्णिमा, हर चांद्र मास में एक बार।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
शुक्ल पूर्णिमा, तिथि 15
सोम, २६ अक्टू॰
कार्तिक स्नान
भोर से पहले स्नान का एक महीना।
कहाँ 4 जल. लौटने वाला पर्व.
संपूर्ण कार्तिक मास, पूर्णिमांत गणना में आश्विन पूर्णिमा से कार्तिक पूर्णिमा तक
मंगल, २७ अक्टू॰ से मंगल, २४ नव॰
नवंबर
२०२६
कार्तिक स्नान
भोर से पहले स्नान का एक महीना।
कहाँ 4 जल. लौटने वाला पर्व.
संपूर्ण कार्तिक मास, पूर्णिमांत गणना में आश्विन पूर्णिमा से कार्तिक पूर्णिमा तक
मंगल, २७ अक्टू॰ से मंगल, २४ नव॰
एकादशी
ग्यारहवीं तिथि, महीने में दो बार।
कहाँ 6 जल. नित्य कर्म.
एकादशी, दोनों पक्षों की तिथि 11
गुरु, ५ नव॰
शुक्र, २० नव॰
नरक चतुर्दशी
छोटी दीपावली, और सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान।
कहाँ 2 जल. प्रमुख पर्व.
कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी, सूर्योदय से पहले
रवि, ८ नव॰
अमावस्या
अमावस्या, जब पितरों को याद किया जाता है।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
अमावस्या, तिथि 30
सोम, ९ नव॰
सोमवती अमावस्या
दीपावली की अमावस्या सोमवार को।
कहाँ 3 जल. वर्ष के महापर्वों में एक.
कार्तिक अमावस्या, सूर्योदय पर, सोमवार को
सोम, ९ नव॰
यम द्वितीया
भाई और बहन साथ यमुना में स्नान करते हैं।
कहाँ एक जल. प्रमुख पर्व.
कार्तिक शुक्ल द्वितीया, शुक्ल पक्ष की तिथि 2
बुध, ११ नव॰
छठ पूजा
सूर्यास्त पर और फिर सूर्योदय पर नदी में खड़े होकर।
कहाँ 3 जल. वर्ष के महापर्वों में एक.
कार्तिक शुक्ल षष्ठी
रवि, १५ नव॰
संक्रांति
सूर्य नई राशि में आता है, वर्ष में बारह बार।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
सूर्य का निरयण राशि-प्रवेश
सोम, १६ नव॰, १९:४९
पूर्णिमा
पूर्णिमा, हर चांद्र मास में एक बार।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
शुक्ल पूर्णिमा, तिथि 15
मंगल, २४ नव॰
कार्तिक पूर्णिमा
देव दीपावली, दीपों से सजे घाट।
कहाँ 5 जल. वर्ष के महापर्वों में एक.
कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा, कार्तिक शुक्ल पक्ष की तिथि 15
मंगल, २४ नव॰
देव दीपावली
कार्तिक पूर्णिमा की शाम, जल से ऊपर तक जगमगाते घाट।
कहाँ 3 जल. वर्ष के महापर्वों में एक.
कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा, संध्या
मंगल, २४ नव॰
दिसंबर
२०२६
एकादशी
ग्यारहवीं तिथि, महीने में दो बार।
कहाँ 6 जल. नित्य कर्म.
एकादशी, दोनों पक्षों की तिथि 11
शुक्र, ४ दिस॰
रवि, २० दिस॰
अमावस्या
अमावस्या, जब पितरों को याद किया जाता है।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
अमावस्या, तिथि 30
मंगल, ८ दिस॰
संक्रांति
सूर्य नई राशि में आता है, वर्ष में बारह बार।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
सूर्य का निरयण राशि-प्रवेश
बुध, १६ दिस॰, १०:३०
वैकुंठ एकादशी
मोक्षदा एकादशी, वैकुंठ का द्वार एक दिन के लिए खुला।
कहाँ 3 जल. वर्ष के महापर्वों में एक.
मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी
रवि, २० दिस॰
पूर्णिमा
पूर्णिमा, हर चांद्र मास में एक बार।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
शुक्ल पूर्णिमा, तिथि 15
बुध, २३ दिस॰
जनवरी
२०२७
एकादशी
ग्यारहवीं तिथि, महीने में दो बार।
कहाँ 6 जल. नित्य कर्म.
एकादशी, दोनों पक्षों की तिथि 11
रवि, ३ जन॰
मंगल, १९ जन॰
अमावस्या
अमावस्या, जब पितरों को याद किया जाता है।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
अमावस्या, तिथि 30
गुरु, ७ जन॰
संक्रांति
सूर्य नई राशि में आता है, वर्ष में बारह बार।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
सूर्य का निरयण राशि-प्रवेश
गुरु, १४ जन॰, २१:१५
मकर संक्रांति
सूर्य उत्तर की ओर मुड़ता है।
कहाँ 6 जल. वर्ष के महापर्वों में एक.
सूर्य का मकर राशि में निरयण प्रवेश
शुक्र, १५ जन॰, २१:१५
पूर्णिमा
पूर्णिमा, हर चांद्र मास में एक बार।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
शुक्ल पूर्णिमा, तिथि 15
शुक्र, २२ जन॰
पौष पूर्णिमा
माघ मेले का पहला स्नान।
कहाँ 2 जल. वर्ष के महापर्वों में एक.
पौष शुक्ल पूर्णिमा
शुक्र, २२ जन॰
माघ स्नान
प्रयागराज की रेत पर एक महीना।
कहाँ एक जल. लौटने वाला पर्व.
संगम पर संपूर्ण माघ मास
शनि, २३ जन॰ से शनि, २० फ़र॰
फ़रवरी
२०२७
माघ स्नान
प्रयागराज की रेत पर एक महीना।
कहाँ एक जल. लौटने वाला पर्व.
संगम पर संपूर्ण माघ मास
शनि, २३ जन॰ से शनि, २० फ़र॰
एकादशी
ग्यारहवीं तिथि, महीने में दो बार।
कहाँ 6 जल. नित्य कर्म.
एकादशी, दोनों पक्षों की तिथि 11
मंगल, २ फ़र॰
बुध, १७ फ़र॰
अमावस्या
अमावस्या, जब पितरों को याद किया जाता है।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
अमावस्या, तिथि 30
शनि, ६ फ़र॰
मौनी अमावस्या
मौन की अमावस्या, माघ का सबसे बड़ा स्नान।
कहाँ 3 जल. वर्ष के महापर्वों में एक.
माघ अमावस्या, सूर्योदय पर
शनि, ६ फ़र॰
बसंत पंचमी
सरस्वती का दिन, और पीले में माघ मेले का स्नान।
कहाँ 2 जल. प्रमुख पर्व.
माघ शुक्ल पंचमी
गुरु, ११ फ़र॰
संक्रांति
सूर्य नई राशि में आता है, वर्ष में बारह बार।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
सूर्य का निरयण राशि-प्रवेश
शनि, १३ फ़र॰, १०:१४
पूर्णिमा
पूर्णिमा, हर चांद्र मास में एक बार।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
शुक्ल पूर्णिमा, तिथि 15
शनि, २० फ़र॰
माघ पूर्णिमा
माघी पूर्णिमा, माघ स्नान के महीने का समापन।
कहाँ 3 जल. वर्ष के महापर्वों में एक.
माघ शुक्ल पूर्णिमा
शनि, २० फ़र॰
मार्च
२०२७
एकादशी
ग्यारहवीं तिथि, महीने में दो बार।
कहाँ 6 जल. नित्य कर्म.
एकादशी, दोनों पक्षों की तिथि 11
गुरु, ४ मार्च
गुरु, १८ मार्च
महाशिवरात्रि
शिव की महारात्रि।
कहाँ 4 जल. वर्ष के महापर्वों में एक.
कृष्ण चतुर्दशी, पूर्णिमांत गणना में फाल्गुन, अमांत में माघ; एक ही क्षण, दो मास-नाम
शनि, ६ मार्च
अमावस्या
अमावस्या, जब पितरों को याद किया जाता है।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
अमावस्या, तिथि 30
सोम, ८ मार्च
सोमवती अमावस्या
फाल्गुन की अमावस्या सोमवार को, महाशिवरात्रि के दो दिन बाद।
कहाँ 2 जल. वर्ष के महापर्वों में एक.
फाल्गुन अमावस्या, सूर्योदय पर, सोमवार को
सोम, ८ मार्च
संक्रांति
सूर्य नई राशि में आता है, वर्ष में बारह बार।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
सूर्य का निरयण राशि-प्रवेश
सोम, १५ मार्च, ०७:०५
पूर्णिमा
पूर्णिमा, हर चांद्र मास में एक बार।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
शुक्ल पूर्णिमा, तिथि 15
सोम, २२ मार्च
अप्रैल
२०२७
एकादशी
ग्यारहवीं तिथि, महीने में दो बार।
कहाँ 6 जल. नित्य कर्म.
एकादशी, दोनों पक्षों की तिथि 11
शुक्र, २ अप्रैल
शनि, १७ अप्रैल
अमावस्या
अमावस्या, जब पितरों को याद किया जाता है।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
अमावस्या, तिथि 30
मंगल, ६ अप्रैल
संक्रांति
सूर्य नई राशि में आता है, वर्ष में बारह बार।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
सूर्य का निरयण राशि-प्रवेश
बुध, १४ अप्रैल, १५:३३
वैसाखी
मेष संक्रांति, सौर नववर्ष, और हरिद्वार की गंगा।
कहाँ 2 जल. प्रमुख पर्व.
सूर्य का मेष राशि में निरयण प्रवेश
बुध, १४ अप्रैल, १५:३३
पूर्णिमा
पूर्णिमा, हर चांद्र मास में एक बार।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
शुक्ल पूर्णिमा, तिथि 15
मंगल, २० अप्रैल
मई
२०२७
एकादशी
ग्यारहवीं तिथि, महीने में दो बार।
कहाँ 6 जल. नित्य कर्म.
एकादशी, दोनों पक्षों की तिथि 11
रवि, २ मई
रवि, १६ मई
अमावस्या
अमावस्या, जब पितरों को याद किया जाता है।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
अमावस्या, तिथि 30
गुरु, ६ मई
अक्षय तृतीया
जो दिन घटता नहीं; गंगोत्री खुलती है।
कहाँ 2 जल. प्रमुख पर्व.
वैशाख शुक्ल तृतीया
रवि, ९ मई
गंगा सप्तमी
गंगा जयंती, नदी का जन्मदिन।
कहाँ 2 जल. प्रमुख पर्व.
वैशाख शुक्ल सप्तमी
बुध, १२ मई
संक्रांति
सूर्य नई राशि में आता है, वर्ष में बारह बार।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
सूर्य का निरयण राशि-प्रवेश
शनि, १५ मई, १२:२४
पूर्णिमा
पूर्णिमा, हर चांद्र मास में एक बार।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
शुक्ल पूर्णिमा, तिथि 15
गुरु, २० मई
वैशाख पूर्णिमा
बुद्ध पूर्णिमा, और वैशाख स्नान।
कहाँ 3 जल. प्रमुख पर्व.
वैशाख शुक्ल पूर्णिमा
गुरु, २० मई
जून
२०२७
एकादशी
ग्यारहवीं तिथि, महीने में दो बार।
कहाँ 6 जल. नित्य कर्म.
एकादशी, दोनों पक्षों की तिथि 11
मंगल, १ जून
सोम, १४ जून
बुध, ३० जून
अमावस्या
अमावस्या, जब पितरों को याद किया जाता है।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
अमावस्या, तिथि 30
शुक्र, ४ जून
गंगा दशहरा
वह दिन जब गंगा धरती पर उतरीं।
कहाँ 3 जल. वर्ष के महापर्वों में एक.
ज्येष्ठ शुक्ल दशमी, ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की तिथि 10
रवि, १३ जून
संक्रांति
सूर्य नई राशि में आता है, वर्ष में बारह बार।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
सूर्य का निरयण राशि-प्रवेश
मंगल, १५ जून, १९:००
पूर्णिमा
पूर्णिमा, हर चांद्र मास में एक बार।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
शुक्ल पूर्णिमा, तिथि 15
शुक्र, १८ जून
जुलाई
२०२७
अमावस्या
अमावस्या, जब पितरों को याद किया जाता है।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
अमावस्या, तिथि 30
रवि, ४ जुल॰
एकादशी
ग्यारहवीं तिथि, महीने में दो बार।
कहाँ 6 जल. नित्य कर्म.
एकादशी, दोनों पक्षों की तिथि 11
बुध, १४ जुल॰
गुरु, २९ जुल॰
संक्रांति
सूर्य नई राशि में आता है, वर्ष में बारह बार।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
सूर्य का निरयण राशि-प्रवेश
शनि, १७ जुल॰, ०५:५३
पूर्णिमा
पूर्णिमा, हर चांद्र मास में एक बार।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
शुक्ल पूर्णिमा, तिथि 15
रवि, १८ जुल॰
गुरु पूर्णिमा
व्यास पूर्णिमा, गुरु की पूर्णिमा, और वर्षा की पहली।
कहाँ 3 जल. प्रमुख पर्व.
आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा
रवि, १८ जुल॰
काँवड़ यात्रा
श्रावण का कृष्ण पक्ष: गंगाजल के लिए हरिद्वार तक पैदल।
कहाँ एक जल. वर्ष के महापर्वों में एक.
श्रावण कृष्ण पक्ष
सोम, १९ जुल॰ से सोम, २ अग॰
सावन
श्रावण, शिव का और सोमवारों का महीना।
कहाँ 3 जल. प्रमुख पर्व.
पूर्णिमांत श्रावण मास
सोम, १९ जुल॰ से मंगल, १७ अग॰
अगस्त
२०२७
काँवड़ यात्रा
श्रावण का कृष्ण पक्ष: गंगाजल के लिए हरिद्वार तक पैदल।
कहाँ एक जल. वर्ष के महापर्वों में एक.
श्रावण कृष्ण पक्ष
सोम, १९ जुल॰ से सोम, २ अग॰
सावन
श्रावण, शिव का और सोमवारों का महीना।
कहाँ 3 जल. प्रमुख पर्व.
पूर्णिमांत श्रावण मास
सोम, १९ जुल॰ से मंगल, १७ अग॰
अमावस्या
अमावस्या, जब पितरों को याद किया जाता है।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
अमावस्या, तिथि 30
सोम, २ अग॰
मंगल, ३१ अग॰
हरियाली अमावस्या
सावन की हरी अमावस्या, 2027 में सोमवार को।
कहाँ 3 जल. प्रमुख पर्व.
श्रावण अमावस्या, सूर्योदय पर
सोम, २ अग॰
एकादशी
ग्यारहवीं तिथि, महीने में दो बार।
कहाँ 6 जल. नित्य कर्म.
एकादशी, दोनों पक्षों की तिथि 11
गुरु, १२ अग॰
शनि, २८ अग॰
पूर्णिमा
पूर्णिमा, हर चांद्र मास में एक बार।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
शुक्ल पूर्णिमा, तिथि 15
मंगल, १७ अग॰
संक्रांति
सूर्य नई राशि में आता है, वर्ष में बारह बार।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
सूर्य का निरयण राशि-प्रवेश
मंगल, १७ अग॰, १४:१७
श्रावण पूर्णिमा
रक्षाबंधन, और श्रावणी स्नान जो यज्ञोपवीत बदलता है।
कहाँ 3 जल. प्रमुख पर्व.
श्रावण शुक्ल पूर्णिमा
मंगल, १७ अग॰
कृष्ण जन्माष्टमी
मथुरा में मध्यरात्रि, यमुना पर।
कहाँ एक जल. वर्ष के महापर्वों में एक.
भाद्रपद कृष्ण अष्टमी, मध्यरात्रि पर
मंगल, २४ अग॰
सितंबर
२०२७
एकादशी
ग्यारहवीं तिथि, महीने में दो बार।
कहाँ 6 जल. नित्य कर्म.
एकादशी, दोनों पक्षों की तिथि 11
शनि, ११ सित॰
पूर्णिमा
पूर्णिमा, हर चांद्र मास में एक बार।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
शुक्ल पूर्णिमा, तिथि 15
बुध, १५ सित॰
पितृ पक्ष
अपने कुल के पितरों के लिए सोलह दिन।
कहाँ 4 जल. प्रमुख पर्व.
पूर्णिमांत गणना में भाद्रपद कृष्ण पक्ष; अमांत गणना में आश्विन कृष्ण पक्ष, एक ही सोलह दिन, दो मास-नामों से
गुरु, १६ सित॰ से गुरु, ३० सित॰
संक्रांति
सूर्य नई राशि में आता है, वर्ष में बारह बार।
कहाँ 6 जल. लौटने वाला पर्व.
सूर्य का निरयण राशि-प्रवेश
शुक्र, १७ सित॰, १४:१४
कुंभ, सिंहस्थ और सौर पंचांग
- कुंभ, अर्ध कुंभ और शाही स्नान की तिथियाँ
- शाही स्नान की तिथियाँ अखाड़ा परिषदें और ज़िला प्रशासन महीनों पहले तय करते हैं। आधिकारिक घोषणा होते ही वे यहाँ आती हैं, घोषणा की कड़ी और जाँचने वाले व्यक्ति के नाम के साथ।
- उज्जैन और नासिक का सिंहस्थ
- सिंहस्थ के वर्ष ग्रह-स्थितियों से तय होते हैं, पर उनके भीतर स्नान की तिथियाँ प्रशासन तय करता है। घोषणा होते ही वे भी उसी तरह यहाँ आती हैं।
- तमिल, बांग्ला, मलयालम और ओड़िया सौर पंचांग
- यह पंचांग अमांत और पूर्णिमांत चांद्र गणना पर चलता है। क्षेत्रीय सौर पंचांग एक अलग पद्धति हैं, जिनका अपना नववर्ष और अपने पर्व हैं।
- अधिक मास के पर्व
- लगभग हर बत्तीस महीने में एक अतिरिक्त मास आता है और एक मास का नाम दो बार पड़ता है। नामित पर्व निज मास में, यानी नियमित मास में, रखे जाते हैं। जिस वर्ष अधिक मास हो, उसके पर्व यहाँ तब प्रकाशित होंगे जब यह नियम यहाँ लागू हो जाएगा।
दिन की चार बेलाएँ
हर बेला एक नियम है, जो सूर्योदय, मध्याह्न या सूर्यास्त से मुहूर्तों में गिनी जाती है। मुहूर्त दिन या रात का पंद्रहवाँ भाग है, इसलिए बेलाएँ ऋतु के साथ घटती-बढ़ती हैं।
ब्रह्म मुहूर्त
लगभग 48 मिनट
सूर्योदय से
- परिभाषा
- सूर्योदय से रात के दो मुहूर्त पहले से एक मुहूर्त पहले तक। रात का मुहूर्त रात का पंद्रहवाँ भाग है, विषुव पर लगभग 48 मिनट और सर्दियों में अधिक।
- यही घड़ी क्यों
- रात के पंद्रह मुहूर्तों में चौदहवाँ, सूर्योदय से दो मुहूर्त पहले शुरू होकर एक मुहूर्त पहले समाप्त। शास्त्र इस घड़ी को स्नान, जप और अध्ययन के लिए बताते हैं। दिन की यही एक बेला है जो स्नान के लिए विधान में कही गई है।
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले आता है, इसलिए यह उस पंचांग-दिवस का है जो पिछले सूर्योदय पर शुरू हुआ था, और इसके साथ लिखी अंग्रेज़ी तारीख़ अगले दिन की होती है। यह पंचांग दोनों को अलग रखता है।
प्रातः स्नान
लगभग 96 मिनट
सूर्योदय से
- परिभाषा
- सूर्योदय से दिन के दो मुहूर्त बाद तक। दिन का मुहूर्त दिनमान का पंद्रहवाँ भाग है, विषुव पर लगभग 48 मिनट और गर्मियों में अधिक।
- यही घड़ी क्यों
- दिन के पहले दो मुहूर्त। यह नित्य अभ्यास का साधारण प्रातः स्नान है, वह घड़ी जब घाट भरते हैं, और वह बेला जिसमें अधिकतर पर्व रखे जाते हैं।
यह बेला सूर्योदय के बाद है, इसलिए इसका पंचांग-दिवस और इसकी अंग्रेज़ी तारीख़ एक ही होते हैं।
अभिजित मुहूर्त
लगभग 48 मिनट
सूर्य के मध्याह्न से
- परिभाषा
- दिन के पंद्रह बराबर मुहूर्तों में आठवाँ, सूर्य के वास्तविक मध्याह्न के आधे-आधे मुहूर्त इधर-उधर, घड़ी की दोपहर के नहीं।
- यही घड़ी क्यों
- विजय का मुहूर्त, जिसे दिन के साधारण दोषों से मुक्त माना जाता है। इसकी अवधि दिन की लंबाई के साथ बदलती है, गर्मियों में लंबी और सर्दियों में छोटी, और यह घड़ी के नहीं, सूर्य के साथ चलता है।
परंपरा बुधवार को अभिजित नहीं मानती, और यह पंचांग भी उस दिन इसे छोड़ देता है।
गोधूलि मुहूर्त
लगभग 24 मिनट
सूर्यास्त से
- परिभाषा
- सूर्यास्त से रात के आधे मुहूर्त तक: लगभग 24 मिनट, सर्दियों में कुछ अधिक।
- यही घड़ी क्यों
- गोधूलि की घड़ी, वह संधि जहाँ दिन बंद होता है। सायं संध्या नित्य कर्म का स्थिर अंग है, और उससे पहले सायं स्नान नदी-घाटों की बसी हुई रीति है, जहाँ शाम की आरती भी इसी घड़ी होती है।
गोधूलि विवाह-मुहूर्त के रूप में अधिक जानी जाती है। सायं स्नान का आधार संध्या है, वह प्रयोग नहीं।
दिन में यह भी दिखता है
- राहु काल
- दिनमान का आठवाँ भाग, जिसका स्थान वार से तय होता है। जहाँ गणना संभव है, पंचांग इसे दिखाता है। राहु काल नए काम, यात्रा और विवाह पर लागू होता है। स्नान नित्य कर्म है, इसलिए इसके लिए कोई बेला नहीं हटाई जाती।
- योग, करण और भद्रा
- गणना करके छापे जाते हैं, जैसे हर पंचांग छापता है। विष्टि करण, यानी भद्रा, नए कामों में टाली जाती है। स्नान नित्य कर्म है, इसलिए ये दिखते हैं और इनके लिए कुछ नहीं हटता।
घाट की घड़ी, अभी
घाट की एक बेला एक क्षण है। आपके कैलेंडर पर उसकी तारीख़ इस पर निर्भर है कि आप कहाँ हैं, और प्रवासी भारतीयों के बड़े हिस्से के लिए वह पिछली शाम होती है।
घाट पर
शुक्र, 25 सित॰
4:45:27 am
IST, सजीव
- अभी खुली
- ब्रह्म मुहूर्त, 4:31 am
- आज का सूर्योदय
- 6:07 am IST
वही क्षण, अन्य जगहों पर
सैन फ़्रांसिस्को
4:15 pm, गुरु, 24 सित॰
आपके यहाँ पिछला दिन।
टोरंटो
7:15 pm, गुरु, 24 सित॰
आपके यहाँ पिछला दिन।
लंदन
12:15 am, शुक्र, 25 सित॰
आपके यहाँ वही दिन।
दुबई
3:15 am, शुक्र, 25 सित॰
आपके यहाँ वही दिन।
सिंगापुर
7:15 am, शुक्र, 25 सित॰
आपके यहाँ वही दिन।
सिडनी
9:15 am, शुक्र, 25 सित॰
आपके यहाँ वही दिन।
अपनी नदी चुनिए
यहाँ का हर पर्व छह जलों में से किसी एक पर रखा जाता है। उससे शुरू कीजिए जिसके पास आप बड़े हुए।
तिथि, नक्षत्र, सूर्योदय और चारों बेलाएँ यहीं astronomy-engine और लाहिड़ी अयनांश से गणना होती हैं। 11 सितंबर 2026 को इन्हें हरिद्वार के लिए सितंबर 2026 से मार्च 2027 के बीच आठ दिनों पर दृक पंचांग से मिलाया गया: हर तिथि और नक्षत्र मिला, हर समाप्ति-समय दो मिनट के भीतर रहा, और सूर्योदय एक मिनट के भीतर। विधि और तालिका docs/panchang-check.md में है। किसी पर्व का दिन अभी भी महीने के रूप में दिया जाता है, और तब तक अनुमानित अंकित रहता है जब तक हर पर्व का दिन-नियम इसी तरह जाँच न लिया जाए।