गंगा दशहरा
वह दिन जब गंगा धरती पर उतरीं।
कब पड़ता है
शुक्रवार, 2 जून 2028
हर की पौड़ी, हरिद्वार के सूर्योदय के अनुसार
- नियम
- ज्येष्ठ शुक्ल दशमी, ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की तिथि 10
- कौन-सा दिन
- सूर्योदय (उदयव्यापिनी)
- सूर्योदय। किसी वर्ष हस्त नक्षत्र और दशहरा योग की अन्य शर्तें पूरी हुईं या नहीं, यह गणना की बात है, और पृष्ठ बताएगा कि कौन-सी पूरी हुईं।
- महत्व
- वर्ष के महापर्वों में एक
- आवृत्ति
- वर्ष में एक बार
यह क्या है
गंगा दशहरा ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दसवीं तिथि है, जो उस दिन के रूप में रखी जाती है जब गंगा धरती पर उतरीं। यह गंगा का अपना दिन है, और वह दिन जब हरिद्वार सबसे अधिक हरिद्वार होता है। शास्त्रीय दशहरा योग चाहता है कि तिथि हस्त नक्षत्र और कई अन्य शर्तों के साथ पड़े। अधिकतर वर्षों में कुछ शर्तें पूरी होती हैं और कुछ नहीं, और दिन फिर भी रखा जाता है। यह उत्तर भारत के वर्ष के सबसे गर्म बिंदु पर, बारिश से कुछ दिन पहले आता है।
कहाँ रखा जाता है
छह में से तीन जल।
गंगा
हर की पौड़ी, हरिद्वार
पूर्णिमांत गणना
हर की पौड़ी पर यह दिन सबसे पूरा रखा जाता है, और कथा में अवतरण हरिद्वार में ही रखा गया है।
त्रिवेणी संगम
संगम, प्रयागराज
पूर्णिमांत गणना
संगम इसे गंगा के दिन की तरह रखता है, हरिद्वार से छोटी भीड़ और वही जल।
यमुना
विश्राम घाट, मथुरा
पूर्णिमांत गणना
विश्राम घाट तिथि रखता है। यमुना का अपना अवतरण-दिन, यमुना छठ, चैत्र में पड़ता है।
बेलाएँ
ब्रह्म मुहूर्त
लगभग 48 मिनट
सूर्योदय से
- परिभाषा
- सूर्योदय से रात के दो मुहूर्त पहले से एक मुहूर्त पहले तक। रात का मुहूर्त रात का पंद्रहवाँ भाग है, विषुव पर लगभग 48 मिनट और सर्दियों में अधिक।
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले आता है, इसलिए यह उस पंचांग-दिवस का है जो पिछले सूर्योदय पर शुरू हुआ था, और इसके साथ लिखी अंग्रेज़ी तारीख़ अगले दिन की होती है। यह पंचांग दोनों को अलग रखता है।
प्रातः स्नान
लगभग 96 मिनट
सूर्योदय से
- परिभाषा
- सूर्योदय से दिन के दो मुहूर्त बाद तक। दिन का मुहूर्त दिनमान का पंद्रहवाँ भाग है, विषुव पर लगभग 48 मिनट और गर्मियों में अधिक।
यह बेला सूर्योदय के बाद है, इसलिए इसका पंचांग-दिवस और इसकी अंग्रेज़ी तारीख़ एक ही होते हैं।
हर समय पहले घाट का दिया जाता है, और उसके साथ आपके समयक्षेत्र का। घड़ी कैसे पढ़ी जाती है
समय कहाँ से आता है
- स्रोत
- यहीं गणना, दृक पंचांग से मिलान
- अयनांश
- लाहिड़ी (चित्रापक्ष)
- घाट के निर्देशांक
- हर की पौड़ी, हरिद्वार: 29.9457, 78.1642
शास्त्रीय आधार
गंगावतरण की कथा और दशहरा योग की शर्तों का वर्णन पुराण-साहित्य और ज्येष्ठ मास के निबंध-विवेचन में है। उद्धरण योग्य संस्करण और अंश अभी जोड़ा जाना है।
यहाँ की हर तिथि गणना से आती है: घाट के सूर्योदय पर तिथि, जिस संक्रांति को समेटे वह मास, और लाहिड़ी अयनांश के अनुसार सूर्य का हर राशि में प्रवेश। तिथि, नक्षत्र, सूर्योदय और बेलाएँ हरिद्वार के लिए सितंबर 2026 से मार्च 2027 के बीच आठ दिनों पर दृक पंचांग से मिलाई गईं, मिनट तक। तिथियाँ हर सुबह आगे बढ़ती हैं।